'कतार में खड़े '
चल रहे हे
सब कतारों में खड़े
कौन पीछे
कौन आगे न ख़बर।
किस तरफ़ हे जा रही यह भीड़ अब
दिल की धड़कन तेज थी
अब कम हुई।
रुक गया हे वक्त
लगता हे हमें
चलते चलते रौशनी मद्धम हुई।
गिर रहे हे
काफिले
मंजर पे अब
आस में बेठी
उमीदे
कम हुई ।
डॉ किरण बाला
शनिवार, 29 अगस्त 2009
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